इस 29वें राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस पर बनें हरित

इस 29वें राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस पर बनें हरित

29वें राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन 14 दिसम्बर 2019 को होगा

The Voice of Chandigarh News:

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए 14 दिसम्बर को राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन किया जाता है, इसके माध्यम से उर्जा स्रोतों के संरक्षण को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है। हर व्यक्ति को अपने व्यवहार में उर्जा संरक्षण को अपनाना चाहिए, ताकि उर्जा संरक्षण की योजना को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। आम जनता को उर्जा का मूल्य समझाना और उर्जा बचाने के बारे में जागरुक बनाना इसका मुख्य उद्देश्य है।

पेट्रोलियम कन्ज़र्वेशन रिसर्च एसोसिएशन ने 1978 में एक अभियान का आयोजन किया, जिसके माध्यम से लोगों को जागरुक बनाया गया कि जीवाश्म ईंधन और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से करोड़ों रूपए बचाए जा सकते हैं। ब्यूरो आफ एनर्जी एफिशिएन्सी के दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारत सरकार की संस्था ने 2001 में फैसला लिया कि हर साल लोगों को उर्जा और इसके संरक्षण के बारे में जागरुक बनाने के लिए राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन किया जाना चाहिए। उर्जा संरक्षण आज समय की मांग बन चुका है, जो दुनिया के लिए बेहद ज़रूरी है।

उर्जा संरक्षण् का अर्थ है उर्जा का तर्कसंगत उपयोग करना, ताकि इसकी बर्बादी न हो। हमारे पास गैर-नव्यकरणी उर्जा के सीमित संसाधन हैं, ऐसे में मौजूदा आपूर्ति से उर्जा बचाना और नव्यकरणी स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, ताकि यह हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध हों

पिछले तीन दशकों में तीव्र आर्थिक विकास और आबादी बढ़ने के कारण उर्जा का उपयोग बढ़ा है। भारत सरकार उर्जा संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कार्बन या पर्यावरण उर्जा कर का 50 फीसदी शुल्क लेती है। ऐसे में उर्जा के अधिक उपभोग पर कर लगाने से उर्जा की खपत कम हाुई है और लोगों में उर्जा के सीमित उपयोग के बारे में जागरुकता बढ़ी है।

भारत दुनिया में गैर-नव्यकरणी उर्जा का सबसे बड़ा उपभोक्ता है; और एक अनुमान के मुताबिक अगले दशक तक भारत उर्जा की मांग की दृष्टि से चीन को भी पार कर जाएगा। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत को इस मांग को पूरा करने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

भारत सरकार ने कार्बन डाई आक्साईड का उत्सर्जन कम करने के लिए द्विआयामी दृष्टिकोण अपनाया है, ताकि इसके कारण धरती को नुकसान न पहुंचे। वहीं दूसरी ओर सरकार नव्यकरणी उर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, इसके लिए सौर एवं पवन उर्जा का उपयोग किया जा रहा है, इसके अलावा कोयला आधारित पावर प्लान्ट्स के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

देश के ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में हमें गैर-नव्यकरणी उर्जा के उपयोग के बारे में जागरुक होना चाहिए ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए उर्जा बचा सकें। हमें सरकार द्वारा तय नियमों, नीतियों का पालन करना चाहिए, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्तर पर हमें पर्यावरण को बचाने के प्रयास करने चाहिए, हमें पानी और बिजली की ज़्यादा से ज़्यादा बचत करनी चाहिए। ये छोटे कदम उर्जा संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

त्रिपत गिरधर-अरबन प्लानर, चण्डीगढ़
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