Statement of BJYM National Media Incharge and Spokesperson Shivam Chhabra on Fuel  price cut

Statement of BJYM National Media Incharge and Spokesperson Shivam Chhabra on Fuel  price cut

The Voice of Chandigarh News | Photo By T S Bedi

Statement of BJYM National Media Incharge and Spokesperson Shivam Chhabra on Fuel  price cut 

पेट्रोल और डीजल के दाम में केंद्र सरकार ने 2.50 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। केंद्र सरकार ने उत्पाद कर में 1.50 रुपये प्रति लीटर की दर से कटौती कर उपभोक्ता को लगातार बढ़ रहे ईंधन के दाम से थोड़ी राहत दिलाने की कोशिश की है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उत्पाद कर में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की  है जबकि तेल विपणन कंपनियों को एक रुपये प्रति लीटर का दबाव वहन करना होगा। जेटली की अपील पर कई राज्यों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त राहत दी।


भाजपा/एनडीए शासित राज्य सकरारों ने अपन यहां वैट/बिक्री कर में इसी के बाराबर (2.50 रुपए प्रति लीटर) की कमी की है. केंद्र सरकार की इस घोषणा के बाद गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत अधिकतर भाजपा शासित राज्यों ने वैट में 2.50 रुपये की कटौती की है. इससे इन राज्यों में पेट्रोल-डीजल की प्रभावी कीमत पांच रुपये प्रति लीटर कम हो गई है।

वहीं पंजाब, कर्नाटक, केरल और दिल्ली जैसे राज्यों ने ईंधन की कीमतों में और कटौती करने से मना कर दिया है ।

भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार के चार साल के कार्यकाल में यह दूसरी बार है जब पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उत्पाद शुल्क में कटौती से केंद्र सरकार को 10,500 करोड़ रुपये के कर राजस्व का नुकसान होगा।

नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच नौ किस्तों में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की गई थी. जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसमें दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी.

ग्राहकों को तीन तरीके से कीमत कटौती का फायदा पहुंचाने की व्यस्था की गयी है। इसमें पहला लाभ डीजल, पेट्रोल पर केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में डेढ़ रुपये प्रति लीटर की कटौती से, दूसरा पेट्रोलियम विपणन कंपनियां एक रुपये प्रति लीटर का बोझ खुद उठाने से तथा राज्यों में वैट या अन्य शुल्क कम किए जाने से मिलेगा। पेट्रोलियम कीमतें बढ़ने से राज्यों का राजस्व बढ़ा है और राज्यों के लिए ढाई रुपये प्रति लीटर तक बोझ वहन करना आसान होगा.

यह उन राज्यों और उनके नेताओं के लिए परीक्षा की घड़ी है जो सिर्फ मौखिक सहानुभूति जताते हैं और ट्वीट करते रहते हैं। इस बार यदि अन्य राज्य सरकारें ऐसा नहीं करती हैं तो जनता उनसे सवाल जरूर पूछेगी.

सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के एक रुपये प्रति लीटर का बोझ वहन करने के निर्देश को पेट्रोल-डीजल पर फिर से सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के तौर पर देखा जा सकता है, परंतु, आम जनता के हित में यह आवश्यक है और, सर्वहितकारी, लोक कल्याणकारी सरकार की ज़िम्मेवारियाँ भी यही होती हैं, जिन्हें NDA सरकार ने बख़ूबी पूरा किया है।

सरकारी कंपनियों की आय पर इस एक रुपये प्रति लीटर कीमत वहन करने का सालाना बोझ 10,700 करोड़ रुपये होगा । इसमें करीब आधा बोझ इंडियन ऑयल पर और बाकी का बोझ हिस्सेदारी हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम पर जा सकता है.

केंद्र पेट्रोल और डीजल पर क्रमश: 19.48 और 15.33 रुपए प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क लगा रहा था। आज तेल विपणन कंपनियों की स्थिति पहले से अच्छी है और वे एक रुपए लीटर का बोझ उठा सकती हैं । केंद्र सरकार द्वारा राज्यों से कहा जा रहा है कि केन्द्र की 2.50 रुपये की कटौती की तर्ज पर सभी राज्य भी 2.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती को प्रभावी करें । यह काम राज्यों के लिए आसान है । राज्यों का औसत VAT 29 फीसदी है, इसलिए कच्चा तेल का दाम बढ़ने पर राज्यों को अधिक इजाफा होता है । वहीं केन्द्र की कमाई स्थिर रहती है ।

इसलिए हम पंजाब सरकार से मांग करते है कि सिर्फ बयानबाज़ी करने से बाज़ आये और जनता को राहत देने का कार्य करे।

इस प्रेस कांफ्रेंस में विशेष रूप से भारतीय जनता युवा के राष्‍ट्रीय मीडिया इंचार्ज ओर प्रवक्ता शिवम छाबड़ा  मौजूद रहे, राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अमित राना,  भाजयुमो चंडीगढ़ अध्यक्ष गोरव गोयल, प्रदेश प्रवक्ता भाजयुमों चंडीगढ़ विक्रम बावा मौजूद रहे |

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